क्यों मानते है हरिद्वार को इतना महत्वपूर्ण

भारत वर्ष देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की धरती मानी जाती है

और राज्य उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है।  उत्तराखंड में वैसे तो कई धर्म स्थल हैं

लेकिन हरिद्वार इन सभी में अपना खास स्थान रखता है। हरिद्वार हिंदुओं के पवित्र धर्म-स्थलों में से एक है।

हिंदुओं की पवित्र नदी मां गंगा हरिद्वार में ही पहली बार मैदानों में प्रवेश करती है,

इसिलिये हरिद्वार को गंगाद्वार के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है

कि हरिद्वार वह स्थान है जहां अमृत की कुछ बूंदें गिरी थीं। दुनियाभर मे श्रद्धालु हरिद्वार आते हैं,

और गंगा नदी के तट पर पूजा-पाठ और स्नान कर पुन्य प्राप्त करते हैं।

हरिद्वार के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे,, लेकिन आइये सबसे पहले देखते हैं हर की पौड़ी पर होने वाली आरती।

माँ गंगा की इस आरती का अपना ही महत्व है। पूरे विधि-विधान के साथ मां गंगा की आरती की जाती है।

हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी सबसे पवित्र धर्मस्थलों में से एक है। यहां देश ही नहीं बल्कि विश्व भर से श्रद्धालु आते हैं

और यहां स्नान कर पुन्य अर्जित करते हैं।पूरा हिंदू समाज मां गंगा मां के पवित्र जल को मोक्षदायी मानता है

और हर की पौड़ी पर आकर स्नान कर श्रद्धालु अपने पापों को धोते हैं,

और पुन्य प्राप्त करते हैं।हरिद्वार में देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं।

हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक धर्म नगरी हरिद्वार हमेशा ही भक्तजनों के साथ झूमती नज़र आती है।

हरिद्वार  का वातावरण हमेशा ही भक्तिपूर्ण रहता है। जहां देखो वहीं श्रद्धालु भगवान की भक्ति में लीन नज़र आते हैं।

इसके साथ ही हरिद्वार में बहुत सारे मंदिर और आश्रम हैं।

हर शाम सूर्यास्त के समय साधु, सन्न्यासी गंगा आरती करते हैं,

उस समय नदी का नीचे की ओर बहता जल पूरी तरह से रोशनी में नहाया होता है

और याजक अनुष्ठानों में संलग्न होते हैं। हर शाम होने वाली इस आरती का अपना अलग ही नज़ारा है।हम सबको एक बार हर

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